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कोरोना का बिना सुई वाला टीका भी लगाएगी सरकार… 1 करोड़ खुराक की खरीदी का आदेश

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नई दिल्ली (ए)। देश में कोरोना वायरस के खिलाफ जल्द ही एक और बड़ा हथियार मिलने जा रहा है। केंद्र सरकार ने अहमदाबाद की कंपनी जाइडस कैडिला की तीन खुराक वाले टीके ‘जाइकोव-डी’ की एक करोड़ खुराक खरीदने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही यह टीका राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान में इस महीने शामिल हो जाएगा। आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी।

सूत्रों ने बताया कि समझा जाता है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश में विकसित दुनिया के पहले डीएनए-आधारित कोविड-19 टीके को टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल करने के लिए शुरुआती कदमों को हरी झंडी दिखा दी है। शुरुआत में इसे वयस्कों को लगाने में प्राथमिकता दी जाएगी। जाइकोव-डी पहला ऐसा टीका है जिसे भारत के औषधि नियामक ने 12 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों के टीकाकरण के लिए मंजूरी दी है। इस टीके का इस्तेमाल बिना सुई की मदद से फार्माजेट तकनीक से किया जाएगा।

क्या है फार्माजेट तकनीक ?

फार्माजेट तकनीक एक सुई रहित तकनीक है जिसमें सुई की जरूरत नहीं पड़ती है। बिना सुई वाले इन्जेक्शन में दवा भरी जाती है, फिर उसे एक मशीन में लगाकर बांह पर लगाते हैं। मशीन पर लगे बटन को क्लिक करने से टीके की दवा अंदर शरीर में पहूँच जाती है।

कितनी है टीके की कीमत ?

एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि केंद्र जाइडस कैडिला को जाइकोव-डी टीके की एक करोड़ खुराक के लिए ऑर्डर दे चुका है, जिसकी कीमत टैक्स को छोड़कर करीब 358 रुपए है। इस कीमत में 93 रुपए की लागत वाले ‘जेट एप्लीकेटर’ का खर्च भी शामिल है। इसकी मदद से ही टीके की खुराक दी जाएगी। सूत्र ने बताया, ‘सीमित उत्पादन क्षमता की वजह से शुरू में सिर्फ वयस्कों को ही यह टीका दिये जाने की संभावना है।’

हर महीने उपलब्ध करा सकता है 1 करोड़ खुराक

कंपनी के अधिकारियों ने मंत्रालय को बताया कि जाइडस कैडिला प्रति माह जाइकोव-डी की एक करोड़ खुराक मुहैया कराने की स्थिति में है। इसके तीन खुराकों को 28 दिनों के अंतराल पर दिया जाना है। देश में विकसित यह दुनिया का पहला ऐसा टीका है जो डीएनए-आधारित और बिना सुई वाली है। जाइकोव-डी को 20 अगस्त को दवा नियामक से आपातकालीन इस्तेमाल के लिये मंजूरी मिली थी । 

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