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भिलाई महिला महाविद्यालय के आईक्यूएसी एवं शिक्षा विभाग द्वारा युवा व्याकरणाचार्य स्वामी आदित्य देव का “योग और जीवन को अधिक सार्थक बनाना“ विषय पर अतिथि व्याख्यान का आयोजन

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भिलाई। भिलाई महिला महाविद्यालय के आईक्यूएसी एवं शिक्षा विभाग द्वारा अतिथि व्याख्यान “योग और जीवन को अधिक सार्थक बनाना “ विषय पर अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया।

अतिथि व्याख्यान हेतु हरिद्वार से आए केन्द्रीय प्रभारी – युवा भारत, युवा व्याकरणाचार्य स्वामी आदित्य देव ने उपस्थित छात्राओं तथा फैकल्टी मेम्बर्स को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति व पाश्चात्य संस्कृति दोनों समृद्ध और विविध हैं लेकिन दोनों के बीच मूलभूत अंतर है। “योग स्वयं पर मेरा उपकार है, मै स्वयं संपूर्ण राष्ट्र का प्रतिनिधि हूँ।” उन्होंने कहा कि प्रथम सुख निरोगी काया है अतः शरीर कों स्वस्थ रखना हमारी जिम्मेदारी है। हमारा शरीर ईश्वर द्वारा हमें दिया गया उपहार है जिसकी रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है।

इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर भिलाई महिला महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ संध्या मदन मोहन ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की ऐतिहासिक जीवन शैली में योग का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वैदिक काल में योग व साधना के माध्यम से ही संस्कार विकसित किए जाते रहे हैं। मानव शरीर पंचतत्त्व से बना है, हम प्रकृति के जितने क़रीब रहेंगे उतने स्वस्थ रहेंगे। स्वस्थ रहना हमारी जीवन शैली पर आधारित है। उत्तम स्वास्थ्य के लिए योग हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग होना चाहिये।

शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ मोहना सुशांत पंडित ने कहा कि योग वर्तमान में नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के तहत् पाठ्यक्रम का हिस्सा बन रहा है। योग एक आध्यात्मिक अभ्यास हैं जो हमें शारीरिक रूप से होने वाली कई बीमारियों से बचाता है।

इस दौरान कार्यक्रम में उपस्थित युवा भारत प्रभारी-छत्तीसगढ़ स्वामी नरेंद्र देव ने युवा छात्राओं को संबोधित करते हुए योग का जीवन में महत्व बताया।

कार्यक्रम में राज्य प्रभारी युवा भारत जयंत भारती, नरेंद्र पटेल तथा भोज सहित छत्तीसगढ़ योग एसोसिएशन के पदाधिकारी व सदस्यगण विशेष रूप से उपस्थित थे। महाविद्यालय से विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, सहायक प्राध्यापिकायें एवं छात्राएँ बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल हुईं।

कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षा विभाग की सहायक प्राध्यापिकाओं भावना, नाजनीन बेग, आशा आर्य एवं काकोली सिंघा का उल्लेखनीय योगदान रहा।

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