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भिलाई महिला महाविद्यालय की बीएड छात्राओं ने किया बारनवापारा वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी का शैक्षणिक भ्रमण

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बीएड छात्राएँ विभिन्न वन्य-प्राणियों और प्राकृतिक वनस्पतिलोक से हुईं रूबरू….धार्मिक स्थल बाल्मीकि आश्रम एवं लव-कुश की जन्मस्थली का भी किया दौरा

भिलाई महिला महाविद्यालय के बीएड स्टूडेंट्स तथा फैकल्टी मेम्बर्स का दल पहुँचा बारनवापारा वन्य-जीव अभ्यारण्य

भिलाई। भिलाई एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा हॉस्पीटल सेक्टर में संचालित भिलाई महिला महाविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन द्वारा कॉलेज के बीएड प्रशिक्षुओं के लिए बारनवापारा अभ्यारण्य के एक-दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया। गौरतलब है कि छतीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में स्थित 245 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ बारनवापारा अभ्यारण्य समतल व पहाड़ी क्षेत्र का मिश्रण है। इस क्षेत्र में बाघ, तेंदुआ, हिरण, भालू, जंगली भैंसा आदि वन्य-जीव स्वछन्द रूप से विचरण करते देखे जाते हैं जो की विजिटर्स के लिए आकर्षण का केंद्र होते हैं।

भिलाई महिला महाविद्यालय की प्रिन्सिपल डॉ संध्या मदन मोहन ने शैक्षणिक भ्रमण के सफल आयोजन पर बधाई दी तथा कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण स्टूडेंट्स को संसार के व्यावहारिक ज्ञान को प्राप्त करने का सुनहरा अवसर प्रदान करते हैं और हमारे किताबी ज्ञान में वृद्धि करते हैं। महाविद्यालय के शिक्षा विभाग की हेड डॉ मोहना सुशांत पंडित ने बताया कि महाविद्यालय के बीएड स्टूडेंट्स को प्रति वर्ष शैक्षणिक भ्रमण कराया जाता रहा है ताकि वे विशेष रूप से छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति एवं पर्यटक स्थलों के बारे में विस्तृत व व्यक्तिगत रूप से जान सकें। शैक्षणिक भ्रमण के माध्यम से छात्राओं में समूह में रहने की प्रवृत्ती, नायक बनने की क्षमता तथा आत्म विश्वास एवं भाईचारे की भावना प्रबल होती है अतः शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के सम्पूर्ण व्यक्तित्व विकास के लिए महत्वपूर्ण कड़ी है।

भिलाई महिला महाविद्यालय की बीएड कोर्स की छात्राएँ बारनवापारा वन्य-जीव अभ्यारण्य की विजिट के दौरान चार सींग वाले हिरण, बाघ, तेंदुए, जंगली भैंसें, अजगर, बार्किंग हिरन, हाइना, साही, चिंकारा और ब्लैक बक्‍स आदि से रूबरू हुईं वहीं कई प्रकार के पक्षी जैसे – बगुले, बुलबुल, इरगेट्स और तोता आदि की कई प्रजातियां भी देखीं। इस वन क्षेत्र में शुष्क पर्णपाती पेड़ों और अन्य पेड़ों जैसे तेंदू, बीर, सेमल, साक, टीक और बेंत आदि के वृक्षों को भी देखा और विभिन्न वनस्पतियों का भी अध्ययन किया। बीएड छात्राओं ने स्थानीय निवासियों से चर्चा कर वन्य-जीवन संबंधी जानकारी भी प्राप्त की।

इसके पश्चात बीएड छात्राओं के इस दल ने अपने शैक्षणिक भ्रमण के दौरान बारनवापारा अभ्यारण के समीप स्थित धार्मिक स्थल बाल्मीकि आश्रम एवं लव-कुश की जन्मस्थली तुरतूरिया की भी विज़िट की। जनश्रुति है कि त्रेतायुग में महर्षि वाल्मीकि का आश्रम यही पर था और लवकुश की यही जन्मस्थली थी। यह एक प्राकृतिक एवं धार्मिक स्थल है जो कि रायपुर जिले से 84 किमी एवं बलौदाबाजार जिला से 29 किमी दूर कसडोल तहसील से 12 और सिरपुर से 23 किमी की दूरी पर स्थित है जिसे तुरतूरिया के नाम से जाना जाता है। उक्त स्थल को सुरसुरी गंगा के नाम से भी जाना जाता है। तुरतूरिया प्राकृतिक दृश्यों से भरा हुआ एक मनोरम स्थान है जो कि पहाड़ियों से घिरा हुआ है। तुरतुरिया बहरिया नामक गांव के समीप बलभद्री नाले पर स्थित है। धार्मिक एवं पुरातात्विक स्थल होने के साथ-साथ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण भी यह स्थल पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। छात्राओं ने स्थानीय लोगों से चर्चा के दौरान यह जाना कि बलभद्री नाले का जलप्रवाह चट्टानों के माध्यम से होकर निकलता है तो उसमें से उठने वाले बुलबुलों के कारण तुरतुर की ध्वनि निकलती है। जिसके कारण इस स्थल को तुरतुरिया नाम दिया गया है। इसका जलप्रवाह एक लम्बी संकरी सुरंग से होता हुआ आगे जाकर एक जलकुंड में गिरता है जिसका निर्माण प्राचीन ईटों से हुआ है। जिस स्थान पर कुंड में यह जल गिरता है वहां पर एक गाय का मुख बना दिया गया है जिसके कारण जल उसके मुख से गिरता हुआ दृष्टिगोचर होता है। गोमुख के दोनों ओर दो प्राचीन प्रस्तर की प्रतिमाए स्थापित हैं जो कि विष्णु जी की हैं इनमें से एक प्रतिमा खड़ी हुई स्थिति में है तथा दूसरी प्रतिमा में विष्णुजी को शेषनाग पर बैठे हुए दिखाया गया है।

समस्त छात्राओं ने इस शैक्षणिक भ्रमण को ज्ञानवर्धन की दृष्टि से अत्यंत ही महत्वपूर्ण बताया और खूब एंजॉय किया।

शैक्षणिक भ्रमण के सफल आयोजन में शिक्षा विभाग की सहा. प्राध्यापिकाओं श्रीमती हेमलता सिदार, भावना, नाजनीन बेग, आशा आर्या, काकोली सिंघा, मधु यादव, सत्यम मिश्रा आदि का सहयोग रहा।

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