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अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस के अवसर पर भिलाई महिला महाविद्यालय में हुआ प्रेरक व्याख्यान का आयोजन

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शांति ही सफलता की कुंजी है : ब्रम्हकुमारी प्राची बहन

भिलाई। भिलाई एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा सेक्टर 9 में संचालित भिलाई महिला महाविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी एवं बॉटनी विभाग द्वारा आज मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस के अवसर पर महाविद्यालय के पायोनीर एसोसिएशन के बैनर तले प्रेरक व्याख्यान का वर्चुअल आयोजन किया गया।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए ब्रम्हकुमारी संगठन, भिलाई की ब्रम्हकुमारी प्राची बहन के द्वारा मन की शांति, घर की शांति और परिवार की शांति को कैसे बनाए रखा जाये इस विषय पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा की शांति हमारे अंतर्मन से आती है और शांत मन से सभी कार्यों को सफल बनाया जा सकता है क्योंकि शांति ही सफलता की कुंजी है। ब्रम्हकुमारी प्राची बहन ने आयोजन में उपस्थितजनों से अपने जीवन की तुलना किसी और के जीवन से कभी भी न करने की सलाह दी।

इससे पूर्व कार्यक्रम के प्रारंभ में भिलाई महिला महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ संध्या मदन मोहन ने आयोजन की मुख्य वक्ता ब्रम्हकुमारी प्राची बहन का स्वागत करते हुए कहा की जीवन में शांति का बहुत महत्व होता है बिना शांति के जीवन का कोई आधार नहीं होता है। शांति, सौहार्द एवं पारस्परिक प्रेम मनुष्य के जीवन की अहम कुंजियाँ हैं। विश्व शांति मानव कल्याण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने ब्रम्हकुमारी संगठन द्वारा शांति हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए उनके कार्यों को रेखांकित किया। विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ भावना पांडे ने अपना उदबोधन शांति के संबंध में अल्बर्ट आइन्स्टाइन द्वारा कही गयी पंक्तियों “शांति बल द्वारा प्राप्त नहीं होती अपितु सामंजस्य से प्राप्त होती है” से प्रारंभ करते हुए बताया की अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस की शुरुआत 21 सितंबर 1981 से की गयी थी। बॉटनी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ प्रतीक्षा पांडे ने गांधी और शांति पर प्रकाश डाला तथा कार्यक्रम की मुख्य वक्ता ब्रम्हकुमारी प्राची बहन का संक्षिप्त परिचय दिया।

कार्यक्रम की समीक्षा विभाग की सहायक प्राध्यापिका श्रीमती भाविका शर्मा एवं संचालन डॉ वर्षा चंद्राकर द्वारा किया गया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ दीप्ति चौहान द्वारा किया गया। आयोजन को सफल बनाने में विभाग की सहायक प्राध्यापिकाओं श्रीमती सबीहा नाज़, श्रीमती दिव्या पैकरा, डॉ रंजना साहू एवं साधना गुप्ता का सराहनीय योगदान रहा। कार्यक्रम में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के फैकल्टी मेम्बर्स सहित बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी एवं बॉटनी विभाग की बीएससी तथा एमएससी की छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

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