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गुरुवार 9 सितम्बर 2021 : आज का अंक राशिफल और पंचांग; हरितालिका तीज स्पेशल

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भिलाई डेस्क। ज्योतिष शास्त्र की तरह अंक ज्योतिष से भी जातक के भविष्य, स्वभाव और व्यक्तित्व का पता लगता है। जिस तरह हर नाम के अनुसार राशि होती है उसी तरह हर नंबर के अनुसार अंक ज्योतिष में नंबर होते हैं। अंकशास्त्र के अनुसार अपने नंबर निकालने के लिए आप अपनी जन्म तिथि, महीने और वर्ष को इकाई अंक तक जोड़ें और तब जो संख्या आएगी, वही आपका भाग्यांक होगा। उदाहरण के तौर पर महीने के 2, 11 और 20 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 2 होगा। जानें कैसा रहेगा आपका गुरुवार 9 सितम्बर 2021 का दिन –

अंक 1

आज आपका दिन खुशनुमा रहेगा। कार्यक्षेत्र और व्यापार में लाभ के अवसर सामने आएंगे। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। व्यापार में लाभ के अवसर सामने आएंगे। व्यापारिक यात्रा पर जाने का कार्यक्रम बन सकता है। परिवार में खुशियों का वातावरण रहेगा। दांपत्य जीवन में मधुरता रहेगी। संतान पक्ष से शुभ समाचार की प्राप्ति हो सकती है। मौसम के बदलाव से आपका स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। वाहन और मशीनरी के प्रयोग में सावधानी बरतें।

अंक 2

आज कार्यक्षेत्र और व्यापार में वातावरण आपके अनुकूल रहेगा। साथियों के सहयोग से मुश्किल कार्य भी बन सकेंगे। व्यापार में अचानक लाभ के अवसर सामने आएंगे। व्यापारिक यात्रा पर जाना हो सकता है। महत्वपूर्ण मामलों में भावुकता में आकर निर्णय न लें। परिवार में खुशियों का वातावरण रहेगा। संतान पक्ष से शुभ समाचार की प्राप्ति हो सकती है। पेट के रोग आपको परेशान कर सकते हैं। पुराने मित्रों से मुलाकात संभव है।

अंक 3

आज आपका दिन मिला जुला असर देने वाला रहेगा। कार्यक्षेत्र और व्यापार में वातावरण आपके अनुकूल कम ही रहेगा। नई योजनाओं पर कार्य आरंभ न करें। जोखिमभरे मामलों में निर्णय फिलहाल टाल दें। अहंकार की भावना से दूर रहें। निवेश करना चाहते हैं तो किसी अनुभवी से सलाह अवश्य कर लें। विरोधी सक्रिय हो सकते हैं। विवादों की स्थिति से दूर रहें। स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। नेत्र विकार आपको परेशान कर सकते हैं।

अंक 4

आज आप सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रहेंगे। कार्यक्षेत्र और व्यापार में वातावरण आपके अनुकूल रहेगा। साथियों का सहयोग मिलेगा। अधिकारियों का सानिध्य प्राप्त होगा। नई योजनाओं पर कार्य आरंभ कर सकते हैं। व्यापार में लाभ के अवसर सामने आएंगे। व्यापार के सिलसिले में यात्रा पर जाना हो सकता है। परिवार में खुशियों का वातावरण रहेगा। आपका स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।

अंक 5

आज आपका दिन उपलब्धियों भरा हो सकता है। कार्यक्षेत्र और व्यापार में वातावरण आपके अनुकूल रहेगा। साथियों का सहयोग मिलेगा। अधिकारियों का सानिध्य प्राप्त होगा। नई योजनाओं पर कार्य आरंभ कर सकते हैं। व्यापार में लाभ के अवसर सामने आएंगे। परिवार में खुशियों का वातावरण रहेगा। दांपत्य जीवन में मधुरता रहेगी। संतान पक्ष से शुभ समाचार की प्राप्ति हो सकती है। पेट के रोग आपको परेशान कर सकते हैं।

अंक 6

आज आपका दिन मिला जुला असर देने वाला रहेगा। कार्यक्षेत्र और व्यापार में वातावरण आपके अनुकूल कम ही रहेगा। नई योजनाओं पर कार्य आरंभ न करें। बनते हुए कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं। व्यापार में लाभ के अवसर कम ही सामने आएंगे। हानि हो सकती है। परिवार में किसी बात पर अनबन हो सकती है। मानसिक तनाव आपको परेशान कर सकता है। वाहन और मशीनरी के प्रयोग में सावधानी बरतें।

अंक 7

आज आपका दिन खुशनुमा रहेगा। कार्यक्षेत्र और व्यापार में वातावरण आपके अनुकूल रहेगा। साथियों का सहयोग मिलेगा। अधिकारियों का सानिध्य प्राप्त होगा। नई योजनाओं पर कार्य आरंभ कर सकते हैं। व्यापार में अचानक लाभ के अवसर सामने आएंगे। परिवार में खुशियों का वातावरण रहेगा। धार्मिक आयोजन में शामिल होने का अवसर मिल सकता है। आपका स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।

अंक 8

आज आपका दिन उतार चढ़ाव भरा रहेगा। कार्यक्षेत्र और व्यापार में वातावरण आपके अनुकूल कम ही रहेगा। नई योजनाओं पर कार्य आरंभ न करें। बनते हुए कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं। व्यापार में लाभ के अवसर कम ही सामने आएंगे। व्यापारिक प्रतिस्पर्धा की स्थिति से दूर रहें। विवादों की स्थिति से दूर रहें। वाणी और क्रोध पर नियंत्रण रखें। अपने व्यवहार में सौम्यता बनाए रखें। वाहन के प्रयोग में सावधानी बरतें।

अंक 9

आज आपका दिन खुशनुमा रहेगा। कार्यक्षेत्र और व्यापार में वातावरण आपके अनुकूल रहेगा। साथियों का सहयोग मिलेगा। अधिकारियों का सानिध्य प्राप्त होगा। नई योजनाओं पर कार्य आरंभ कर सकते हैं। व्यापार में अचानक लाभ के अवसर सामने आएंगे। परिवार में खुशियों का वातावरण रहेगा। दांपत्य जीवन में मधुरता रहेगी। आर्थिक मामलों में दिन अनुकूल रहेगा। आपका स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। परिवार में मांगलिक आयोजन हो सकते हैं।

आज का शुभ पंचांग

गुरुवार 9 सितंबर 2021 : हरितालिका तीज आज, शुभ पंचांग से जानिए आज के सभी शुभ-अशुभ मुहूर्त

हरितालिका तीज आज यानी 9 सितंबर, गुरुवार को है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष तृतीया, आनन्द संवत्सर विक्रम संवत 2078, शक संवत 1943 (प्लव संवत्सर), भाद्रपद। तृतीया तिथि सुबह 12 बजकर 18 मिनट तक उपरांत चतुर्थी। नक्षत्र हस्त दोपहर 02 बजकर 31 मिनट तक उपरांत चित्रा। शुक्ल योग रात 08 बजकर 42 मिनट तक, उसके बाद ब्रह्म योग। करण तैतिल दोपहर 01 बजकर 27 मिनट तक, बाद गर देर रात 12 बजकर 18 मिनट तक, बाद वणिज। देर रात 1 बजकर 45 मिनट तक चन्द्रमा कन्या उपरांत तुला राशि पर संचार करेगा।

सूर्य और चंद्रमा का समय-

सूर्योदय – 6:07 AM
सूर्यास्त – 6:29 PM
चन्द्रोदय – Sep 09 8:08 AM
चन्द्रास्त – Sep 09 8:16 PM

आज के शुभ मुहूर्त-

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 31 मिनट से 05 बजकर 17 मिनट तक। 
विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 24 मिनट से 03 बजकर 14 मिनट तक। 
निशिथ काल- मध्‍यरात्रि 11 बजकर 56 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक। 
गोधूलि बेला- शाम 06 बजकर 22 मिनट से 06 बजकर 46 मिनट तक। 
अमृत काल- सुबह 09 बजकर 06 मिनट से 10 बजकर 36 मिनट तक। 
सर्वार्थ सिद्धि योग- दोपहर 03 बजकर 56 मिनट से अगले दिन 06 बजकर 03 मिनट तक।

आज के अशुभ मुहूर्त-

राहुकाल- दोपहर 12 बजे से 01 बजकर 30 मिनट तक। 
यमगंड- सुबह 07 बजकर 30 मिनट से 09 बजे तक। 
गुलिक काल- सुबह 10 बजकर 30 मिनट से 12 बजे तक। 
दुर्मुहूर्त काल- दोपहर 11 बजकर 53 मिनट से 12 बजकर 44 मिनट तक। 
वर्ज्य काल- मध्‍यरात्रि 11 बजकर 50 मिनट से 01 बजकर 20 मिनट तक।

हरितालिका तीज 2021 : नहाय-खाय के साथ बुधवार से हरितालिका तीज व्रत की शुरुआत हुई। गुरुवार को सुहागिन महिलाएं 24 घंटे तक निर्जला रहकर पति की लम्बी उम्र के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करेंगी। कुंवारी लड़कियां भी अच्छे वर और रिश्ते में प्रेम बढ़ाने के लिए यह व्रत रखेंगी।

हरितालिका तीज व्रत भाद्र माह के शुल्क पक्ष तृतीया तिथि को मनाया जाता है। सुहागिन महिलाएं निर्जला व निराहार रखकर तीज व्रत करती हैं। शाम में भगवान शंकर व माता पार्वती की मिट्टी की प्रतिमाएं बनाकर पूजा-अर्चना की जाती हैं। नये-नये परिधानों व सोलह श्रृंगार कर सजी महिलाओं से घर-आंगन चहक उठता है। पूजन के बाद महिलाएं रात भर भजन-कीर्तन करती हैं। अहले सुबह में पारण के बाद महिलाएं अन्न-जल ग्रहण करती हैं। खास यह कि इस बार पूजा का शुभ मुहूर्त दिनभर है।

हरितालिका तीज की पूजा के दो शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। पहला शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 03 मिनट से 8 बजकर 33 मिनट तक और दूसरा शुभ मुहूर्त शाम को 6 बजकर 33 मिनट से रात 8 बजकर 51 मिनट तक है।

अखंड सौभाग्य का प्रतीक है हरितालिका व्रत, पढ़ें भगवान शिव-माता पार्वती से जुड़ी व्रत कथा

भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि हरितालिका तीज के नाम से शिव-पार्वती भक्तों में लोकप्रिय है। यह पर्व शिव-पार्वती के अखंड जुड़ाव का प्रतीक है। समाज में पति और पत्नी के बीच जो जुड़ाव है, वह क्या है? क्या  इनके मध्य कोई ऐसी डोर भी है, जो हमको एक शांत और मंगलकारी परिवार की ओर ले जाती है? दूसरा प्रश्न… परिवार तो अन्य देवों के भी हैं, लेकिन सनातन संस्कृति में शिव परिवार ही क्यों आदर्श बना? 

भगवान शंकर और पार्वती के मिलन के कई प्रसंग हमारे लिए आदर्श हैं। शिव पुराण से लेकर श्रीरामचरितमानस तक अनेक ग्रंथों में शिव और पार्वती को श्रद्धा और विश्वास की संज्ञा दी गई है। श्रद्धा पार्वती जी हैं और विश्वास साक्षात भगवान शंकर हैं। जब एक-दूसरे के प्रति श्रद्धा और विश्वास  होगा, तो वह आदर्श परिवार होगा। जहां इनमें से किसी एक की भी कमी होगी, परिवार संकट और क्लेश में घिर जाएगा। शिव प्रसंग में दो स्त्री आती हैं। एक सती और दूसरी पार्वती। 

हम पार्वती के रूप में स्त्री को अंगीकार करते हैं। क्यों? पार्वती जी को ही हमने अक्षत सुहाग की अधिष्ठात्री माना है, क्योंकि वहां समर्पण है। सती प्रसंग में अपनी जिद है, लेकिन पार्वती के रूप में हर स्त्री सौभाग्यवती है। हरतालिका तीज का प्रसंग भी इसी से जुड़ा है। अविवाहिताओं के लिए मुख्य रूप से यह व्रत है, जो पूर्वांचल और बिहार आदि में प्रमुखता से किया जाता है। पश्चिमांचल में यही व्रत सावन में तीजोत्सव के रूप में आता है। हरतालिका तीज भादों (भाद्रपद) मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को होती है। दोनों की कथा एक ही है, लेकिन मर्म व्यापक है।

पूर्वजन्म में सती होने के बाद देवी ने अगले जन्म में पार्वती के रूप में अवतरण किया। भगवान शंकर को पाने के लिए घोर तप किया। अन्न-जल त्याग दिया। उनका शरीर पर्ण के समान हो गया। यहीं से देवी का नाम अपर्णा पड़ा। भूख और प्यास को सहन करते हुए देवी ने केवल एक ही प्रण किया कि वह शंकर जी को ही वरण करेंगी। तप तो पूरा हुआ, लेकिन भगवान शंकर कहां मानने वाले थे। कथा आती है कि तारकासुर के संहार के लिए शंकर जी ने पार्वती से विवाह किया, क्योंकि तारकासुर को वरदान प्राप्त था कि शंकर जी के पुत्र (गर्भ से उत्पन्न) द्वारा ही वह मृत्यु को प्राप्त हो सकता है। अंततोगत्वा कार्तिकेय के रूप में पार्वती जी ने पुत्र को जन्म दिया और तब जाकर तारकासुर से मुक्ति मिली।

हरतालिका तीज इच्छित वर की कामना का व्रत है। इच्छित वर की कामना को गलत नहीं माना नहीं गया। वरन इसके व्रत भी हैं। हरितालिका इसमें से एक है। कालांतर में, सुहागिन स्त्रियां भी व्रत को करने लगीं। पार्वती जी की तरह निर्जल रहने लगीं। मुख्य उद्देश्य एक ही है शिव ही शिव हो, यानी कल्याण। परिवार में भी और दाम्पत्य जीवन में भी। 

शिव कल्याण के देव हैं और पार्वती जी कल्याणी। पारिवारिक और वैवाहिक, सभी संस्कारों की नींव शिव परिवार से ही पड़ी। यह सुखी और आदर्श परिवार है। इसमें कार्तिकेय के रूप में गर्भोत्पन्न शिशु भी हैं, तो मानस पुत्र के रूप में गणेश जी भी। अशुभता और शुभता का संकेत देने वाला नादिया भी है तो श्रद्धा के रूप में साक्षात पार्वती जी भी हैं। इन सभी का विश्वास शिव में है। शिव का विश्वास इनमें है। इसलिए, शिव परिवार सुखी परिवार है। जिस तरह माता पार्वती का सुहाग अक्षत है, उसी तरह व्रत को करने वालों का भी हो, यही कामना सनातन है। यही हरतालिका है। हम सभी परिवार के लिए कुछ न कुछ समर्पण करते हैं। अन्न-जल का त्याग इसी संकल्प का हिस्सा है। सब सुखी हों, सभी का परिवार श्रद्धा व विश्वास के साथ फूले-फले, यही कामना हमको और हमारी संस्कृति को पल्लवित करती है। 

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